
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने जूस पीकर अपना 26 दिनों का अनशन तोड़ा। इस दौरान लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे।
सोनम वांगचुक ने कहा, "भूख का अंत हुआ है, लेकिन जवाबदेही की शुरुआत हुई है!" उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले लिखित पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति जताई गई है:
अनशन समाप्त होने की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ कि वे डॉक्टरों की सलाह का पालन करें, अपनी दिनचर्या में वापस लौटें और जल्द से जल्द अपना स्वास्थ्य सुधारें। मैं ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूँ।"
वहीं दूसरी ओर, 20 जुलाई को छात्रों के 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुँच गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त आदेश दिए हैं।
सरकार की ओर से कड़े एंटी-पेपर लीक कानून और स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के दिए गए संकेतों के बाद अब सबकी नजरें संसद के मानसून सत्र में होने वाली बहस पर टिकी हैं।
लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन
सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के बाद एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि वे पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मौखिक वादों के बजाय लिखित ठोस आश्वासन चाहते थे।सोनम वांगचुक ने कहा, "भूख का अंत हुआ है, लेकिन जवाबदेही की शुरुआत हुई है!" उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले लिखित पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति जताई गई है:
- संसद में गहन चर्चा: चल रहे मानसून सत्र के दौरान संसद के पटल पर NEET-UG पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
- प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई नहीं: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और 20 जुलाई को 'संसद मार्च' में शामिल छात्रों व युवाओं पर कोई एफआईआर या कानूनी दंडात्मक कार्रवाई दर्ज नहीं की जाएगी।
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक विवाद के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उपयुक्त मुआवजा देने पर केंद्र सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।
65 सांसदों की अपील और पीएम मोदी का संदेश
सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कर उनसे अनशन वापस लेने की भावुक अपील की थी। सांसदों ने भरोसा दिलाया था कि वे इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएंगे।अनशन समाप्त होने की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूँ कि वे डॉक्टरों की सलाह का पालन करें, अपनी दिनचर्या में वापस लौटें और जल्द से जल्द अपना स्वास्थ्य सुधारें। मैं ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूँ।"
जंतर-मंतर से लेकर हाईकोर्ट तक गरमाया मुद्दा
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक ने 28 जून से जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। 26 दिनों के इस अनशन के दौरान उनका वजन 11 किलोग्राम से अधिक घट गया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई थी।वहीं दूसरी ओर, 20 जुलाई को छात्रों के 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुँच गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त आदेश दिए हैं।
छात्र आंदोलन का आगे क्या होगा?
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगें — जैसे धांधली की निष्पक्ष जांच, कड़े कानून का पालन और जवाबदेही तय करना — जब तक पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा।सरकार की ओर से कड़े एंटी-पेपर लीक कानून और स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के दिए गए संकेतों के बाद अब सबकी नजरें संसद के मानसून सत्र में होने वाली बहस पर टिकी हैं।